उद्धरण - 749

यहाँ सदाचार का कुछ मूल्य नहीं है, अपेक्षा ही नहीं है बल्कि ऋण मूल्य है। अगर कहीं भीतर, बहुत भीतर मज्जा तक में, छिपा विकास का कीटाणु है तो यहाँ वह ऊपर रहेगा। यहाँ छल असम्भव है, जो छल कि शिष्ट समाज में जरूरी ही है। यहाँ तहजीब की माँग नहीं है, सभ्यता की आशा नहीं है।

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