उद्धरण - 745
घिसटती हुई चाल, सूखी हुई ज़बान बुझी हुई नेत्रज्योति सर्वव्याप्त और सर्वसुलभ दृश्य था। भगेलू कुम्हार इन्हें देख कर सोचते अगर गांव नहीं छोड़ा तो इन्हीं की गति को पायेंगे। और उस एक रात उन्होंने फ़ैसला किया जिसे अपनी पत्नी को बताया और कमाने के लिए गांव छोड़ दिया।
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