उद्धरण - 734
थकते तो मर्द हैं, स्त्री कभी नहीं थकती है। काम और विश्राम- यह मर्द की ईजाद है। स्त्रियाँ विश्राम नहीं करतीं, क्योंकि वे शायद काम नहीं करतीं। वे कुछ करती ही नहीं.... वे शायद सिर्फ होती ही हैं। बालिका से किशोरी, कुमारी से पत्नी, बेटी से माँ, एक निस्संग आत्मा से परिगृहीत कुनबा--वे निरन्तर कुछ न कुछ होती ही चलती हैं।
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