उद्धरण - 723
जिस ईश्वर के होने -न होने को हम समझ सकते हैं, जिसको निर्गुण, निराकार, अपरिमेय सब कुछ कहकर भी जिसके बारे में हमारा मस्तिष्क इतनी क्षमता रखता है कि उसके होने को अपनी मुठ्ठी में कर सके, किसी अर्थ से कह सके कि वह है, उस ईश्वर के होने-न होने से क्या?
Comments
Post a Comment