उद्धरण - 718

मैं तुम्हारी मदद नहीं करूँगी, कर भी नहीं सकती । लेकिन तुम्हारे काम में दखल भी न दूँगी । चाहे जैसे जीवन व्यतीत करना पड़े, तुम्हें उलाहना नहीं दूँगी । तुम इतना भी विश्वास कर लो कि तुम्हारी जो बातें जान जाउँगी, वे किसी से कहूँगी नहीं।

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