उद्धरण - 716
नासूर होता है, तो उसका इलाज यही है कि नश्तर लगा दिया जाए। उससे दर्द होता है तो क्या वह हिंसा है? वह हिंसा इसलिए नहीं है कि रोगी के भले के लिए है, चिकित्सक का स्वार्थ उसमें नहीं है। और लाइलाज रोग का रोगी अगर दर्द से तड़प रहा हो तो उसे मारक मुक्ति देने में भी हिंसा नहीं है, यद्यपि उसकी जान ले ली गई होगी। यहाँ फिर हिंसा एक सामाजिक कर्तव्य के रूप में आती है।
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