उद्धरण - 707
कहानी या नाटक की नायिका का यह पतिव्रत क्या है? यह एक गुलामी है, चाहे सहर्ष स्वयं स्वीकार की हुई गुलामी जिसके द्वारा वह अपने को अपने पति के, यानी दर्शक के, पुरुष जाति के, और इस प्रकार अन्ततः दर्शक के अधीन करती है! क्योंकि अपने पुरुषत्व के कारण दर्शक ही प्रतिनिधि् रुप में वह पति है।
Comments
Post a Comment