उद्धरण - 699

जो आदमी वेश्याओं के पास नहीं जाता, वह शायद ऑब्जेक्टिव दृष्टि से देख कर कह सकता है कि वेश्याएँ समाज शुद्धि का अप्रत्यक्ष साधन हैं। लेकिन जो आदमी अपनी सब्जेक्टिव वासना का गुलाम कहा जाता है उसे क्या हक है कि वह समाज को ऐसे ऑब्जेक्टिव दृष्टि से देखे?

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