उद्धरण - 698

परोपकार एक व्यक्तिवादी धर्म है और उसके बारे में हर व्यक्ति की अपनी-अपनी धारणा होती है। कोई चींटियों को आटा खिलाता है, कोई अविवाहित प्रौढ़ाओ का मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए अपने मत्थे पर ‘प्रेम करने के लिए हमेशा तैयार‘ की तख्ती लगाकर घूमता है, कोई किसी को सीधे रिश्वत न लेनी पड़े, इसलिए रिश्वत देनेवालों से खुद सम्पर्क स्थापित करके दोनों पक्षों के बीच दिन-रात दौड़-धूप करता है।

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