उद्धरण - 696

....साथ के लिए आती हूँ- कुछ लोगों से मिलने, बात करने- और यहाँ इसलिए कि यहाँ से सहज भाव से मिलते हैं। और मानव और मानव का सहज भाव से साक्षात्- वही हमारा मानव जीवन से और मानवता के जीवन से एकमात्र सम्पर्क हो सकता है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549