उद्धरण - 685

चला जाऊँ उसी अपनी दुनिया में जहाँ वस्तुओं का मान बँधा हुआ है और कोई झमेला नहीं है। जहाँ रास्ता बना बनाया है और खुद को खोजने की जरुरत नहीं है। जिज्ञासा जहाँ शान्त है और प्रश्न अवज्ञा का द्योतक है।

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