उद्धरण - 677

जब सबको छोड़कर मुझे साथ ले चलने को उतावला था, तब भी मैं जानती थी कि थोड़े दिन बाद इसे लौटकर अपने परिवार के बीच आ जाना होगा। जानती थी कि इसी अवश अनुरक्ति में से एक दिन प्रबल विरक्ति का भाव फूटेगा। जानती थी, इसलिए मैं उसे साथ ले आयी।

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