उद्धरण - 676

कभी उसे लगता कि ये टुकड़ियाँ सिद्धान्तों के आसरे बनी हैं, क्योंकि किसी एक में वह प्लेटो को आदर्श रूप में पूजते हुए पाता तो दूसरे में शोपेनहॉर को, किसी में स्टोइक मत पर बहस होती हुई पाता, तो किसी में हीडोनिज़्म की चर्चा, कभी उसे लगता कि यह दलबन्दी अपने -अपने व्यसन-विशेष का समर्थन करने के लिए है....

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