उद्धरण - 671
तुम भी अपने पिता की तरह बार-बार अपनी पगड़ी को हाथ लगाते हो और दोनों कान छूकर देवी को हाथ जोड़ते हो।” रामविलास ने तभी जाना कि उसके पिता बहुत छोटी छोटी आदतों में उसके अंदर जिंदा हैं। एक बार बहूबाजार में फिरंगी काली के यहां भी हो आना”- हाथीपांववाले पंडित ने उसे कहा।
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