उद्धरण - 661
मैं स्त्री-धर्म ही मानती हूँ। उसका स्वतन्त्र धर्म मैं नहीं मानती हूँ। क्यों पतिव्रता को यह चाहिए कि पति उसे नहीं चाहता, तब भी वह अपना भार उस पर डाले रहे? मुझे देखना भी नहीं चाहते यह जानकर मैने उसकी आँखों के आगे से हट जाना स्वीकार कर लिया।
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