उद्धरण - 659
क्रान्तिकारी की बनावट में एक विराट, व्यापक प्रेम की सामर्थ्य तो आवश्यक है ही, साथ ही उसमें एक और वस्तु नितान्त आवश्यक, अनिवार्य है- घृणा की क्षमता, एक कभी न मरने वाली, जला डालने वाली, घोर मारक, किन्तु इतना सब होते हुए भी एक तटस्थ सात्विक घृणा की क्षमता, यानि ऐसी घृणा जिसका अनुभव हम अपने सचेतन मस्तिष्क से करते हैं, ऐसी नहीं जो कि हमें भस्म कर डालती है और पागल करके अपना दास बना लेती है।
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