उद्धरण - 657

उसके घर के लिए जाने वाली सीधी सड़क आने वाली थी। यही वह स्थल था जहां उसकी घबराहट चरम पर पहुंच जाती थी। हालांकि इधर कुछ साल से यही वह स्थल था जहां घर से मुलाक़ात की खुशी अपने सबसे अधिक उभार पर होती थी। किंतु उसके पहले की बात है, यहां आते ही वह डरने लगता : घर में कोई हादसा हुआ होगा और मुहल्ले वाले मातमपुर्सी के लिए घर के सामने भीड़ लगाये होंगे।

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