उद्धरण - 656
‘जब अमुक एक वर्ष का था’ या ‘जिस साल अमुक की लड़की की शादी हुई’... और आज मैं स्वयं हिसाब लगा रही हूँ, तुम से पहली भेंट से दस महीने बाद, तुलियन से आठ महीने बाद, और तुम्हें अन्तिम बार देखा तब से चार महीने....कैसे मानव अपने सारे जगत को अपने छोटे से जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं के आस-पास जमा लेता है, और विराट का समूचा सत्य उस निजी छोटे-से सत्य का सापेक्ष हो जाता है।
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