उद्धरण - 655

रामविलास ने उसी सुबह गंगा में डुबकी लगाते हुए यह प्रतिज्ञा कर ली थी कि वह इसी भूमि पर रहेगा। यहीं बसेगा। यहीं अपने प्राण त्याग करेगा। देश में हवेली बनवाएगा जरूर- वह पिताजी का सपना था - लेकिन वह कभी इस शहर को नहीं छोड़ेगा।

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