उद्धरण - 653

फिर जिनको साथ लेकर पति को छोड़ आयी हूँ, उनको मैं छोड़ दूँ! उन्होंने मेरे लिए क्या नहीं त्यागा? उनकी करुणा पर मैं बची हूँ। मैं मर सकती थी, लेकिन मैं नहीं मरी। मरने को अधर्म जानकर ही मैं मरने से बच गयी। जिसके सहारे मैं उस मृत्यु के अधर्म से बची, उन्हीं को छोड़ देने को मुझसे कहते हो।

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