उद्धरण - 649

मन्नतें और मौत। शायद इस संसार का तम्बू इन्हीं दो छोरों पर तना हुआ है। मन्नतें रक्तबीज की तरह होती हैं। एक के पूरी होने पर अनेक जन्म ले लेती हैं और मृत्यु ही उनकी उर्वरता का समापन कर पाती है।

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