उद्धरण - 636
जो वर्दी पहन कर अपने को उन सब कर्मो का अधिकारी समझते थे, जो उन्होंने गोरे सैनिकों या पुलिस वालों को करते देखा था और देखकर घृणा और विवश क्रोध् से भर गए थे- राह चलतों का धमकाना, किसी गरीब पर शक हो जाने पर उसे गाली देना और सताना, आदि........
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