उद्धरण - 631
पिताजी की ख्वाहिश है कि भिवानी में वे एक बड़ी हवेली बनाएं। शायद इसीलिए वे कलकत्ते में दिन - रात काम करते हैं। एक मिनट आराम नहीं करते। वे खुद कलकत्ता गए और वहीं एक विशाल हवेली चिनवाने का पिताजी का सपना उनके हृदय से निकल कर रामविलास के हृदय में कई परतों के नीचे दबता चला गया।
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