उद्धरण - 613

शायद हमारे मन में पाप का झूठा डर होता है...डर ही से पाप बनते हैं । पर जाता भी तो नहीं वह! मैं सोचता हूँ.....मैं जान देकर तुम्हें अच्छा कर दूँ-’ इस बीच में स्वर फिर रुक गया, मानो किसी ने मुँह के आगे हाथ रख दिया हो-‘पर एक छोटी सी चोरी नहीं होती ।

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