उद्धरण - 581
मैंने इतना समझाया कि देखो अभी मत लाओ। पहले उसके एक्ज़ाम्स होने दो। छुट्टियों में लाकर यहाँ रखना यदि हिल जाए उसका मन लग जाए तो यहाँ भर्ती करा देना। वरना बच्चे के साथ भी तो कितनी ज़्यादती है। पर इनको तो जैसे झख सवार हो गई। रात-रात भर नींद नहीं आती थी। ....... क्या हाल हो गया है बच्चे का? कितना सहमा-सहमा डरा-डरा रहता है। कैसे नहीं भेजूँ इसे हॉस्टल? यह सब सबसे कटकर रहेगा अपने बराबरी के बच्चों के बीच में ही रहेगा तभी नार्मल होगा। हो खर्चा जैसे भी हो-जो भी हो। ...... सारे समय बालकनी मैं बैठा रहा बिलकुल नहीं बोलता। मैं तो खेलने भी बैठी पर सच मुझे तो तरस आने लगा। और इस चीनू को देखो पाँच बजे से ही आँखे फाड़-फाड़कर चारों तरफ़ ऐसे देखता है। जैसे कुछ ढूँढ रहा है। बस तुम्हें ढूँढता है। यह तो अब तुम्हें बहुत मिस करने लगा है।
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