उद्धरण - 583

तुम समाज-समाज चिल्लाओ वो आजा़द दुनिया का नारा लगाएँ। मुनाफे की दुकान अलग है विज्ञापन के ढंग अलग है लेकिन बात एक ही है। तुम दोनों ही गुटों के लोग बेचारे निरीह व्यक्ति पर सामूहिक आक्रमण करते हो। व्यक्ति को स्वतन्त्रता दिलाना चाहता हूँ।

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