उद्धरण - 578
पता नहीं कैसे क्या हुआ कि उसके भीतर दो आँखें और उग आईं और उसके बाद से ही सब कुछ गड़बड़ हो गया। बाहर की आँखों से वह एक चीज़ देखता है तो भीतर की आँखें दूसरी चीज़ देखने लगती हैं। कभी भीतर की चीजे़ बाहर की चीजों को दबोच लेती हैं तो कभी बाहर की भीतर की चीजों को।
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