उद्धरण - 576

जब गुहार-पुकार भी नहीं सुनी जाती तो आदमी किसी भी तरह अपने बचाव में खड़ा हो जाता है। उचित-अनुचित सही गलत को ताक पर रखकर संघर्ष करने लगता है।

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