उद्धरण - 575

कहाँ? ये पत्तियाँ तो सूख रही हैं। माली की हँसी- ये तो सूखेगी ही। उस ज़मीन के खाद-पानी की पत्तियाँ हैं ये तो सूखकर झड़ जाएँगी। फिर नई पत्तियाँ फूटेंगी। जड़ पकड़ने के बाद कोई डर नहीं। और उसने खुद उन मरी-मुरझाई पत्तियों को झाड़ दिया था।

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