उद्धरण - 570
स्त्री तो धरती के समान है हमेशा देने के लिए तैयार है इसलिए निजी सुख और महत्त्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए पुरूष उस पर सम्पूर्ण अधिकार चाहता है। उसे अपना अंहकार प्यारा है इसलिए उसे दूसरे का खयाल नहीं रहता। उसे अपना सुख चाहिए तब वह नहीं देखता कि कहाँ क्या टूटा क्या विभाजित हुआ।
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