उद्धरण - 563

जीवन क्या है मास्टर साहब आपसे सत्त कहता हूँ ग्यानी महात्माओं की चरण रज लेके आ रहा हूँ झूठ नहीं बोलूँगा- मैं कहता हूँ हमसे-आपसे बढ़कर निष्काम कर्मी इन लाखों उपदेश देनेवाले ग्यानी महात्माओं में भी नहीं मिलेगा। हम ससरी बीबी-बच्चों के लिए दिन-रात हाय-हाय करते जीवन खपा देते हैं। साहेबों बड़े बाबुओं की जिस-तिस की ससरे चपरासियों तक की रौब-फटकार सुनके घर आओ तो घर सा घर नहीं लगता। फिर अपनी ज़िन्दगी ही क्या रह गई। जो कुछ रही इन बीबी-बच्चों की रही। हम जीते हैं। तो निष्काम जीते हैं।

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