उद्धरण - 555

औरत के साथ अस्मत का जो हौआ बँधा है उसे माफ़ कीजियेगा मैं नहीं मानती। बॉयोलॉजिकल अर्जेज़ (कायिक आवश्यकताएँ) अपनी जगह पर और ज़िन्दगी का सवाल अपनी जगह पर। मैं एक के हाथ अस्मत बेचकर अपनी आजा़द ज़िन्दगी खराब नहीं करना चाहती हूँ।

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