उद्धरण - 552
शकुन को लग रहा है उसके मन में इस समय कुछ नहीं है । न गिल्ट न जस्टिफ़िकेशन। कुछ है तो सिर्फ दुख कि बंटी चला गया कि बंटी एक दिन भी वहाँ खुश नहीं रहेगा। न उस घर में न हॉस्टल में। बिना शकुन के वह कहीं खुश रह ही नहीं सकता। और इन दिनों तो शकुन के साथ भी।
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