उद्धरण - 551

अब वह सोचते कि उन पर नहीं बल्कि बलिया और भारत की असंख्य जनता की स्वातन्त्र्य भावना नैतिक एवं प्रतिरोध शक्ति पर प्रहार किया जा रहा है और देश के गरीब, सरल, सच्चे, अन्याय-त्रस्त लोगों के कष्टों के मुकाबले तो उनका कष्ट कुछ भी नहीं बल्कि उनको बचाने के लिए उनकी मुक्ति के लिए ही वह सबकुछ बरदाश्त कर रहे हैं।

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