उद्धरण - 547
और इसके साथ ही बहुत सारा शोर तरह-तरह का। और एकाएक ही सारे शोर के ऊपर उभरता है- बंटी मत जा बेटे मैं तेरे बिना नहीं रह सकूँगी। दौड़ती-दौड़ती ममी चली आ रही हैं बदहवास लाल आँखें। पर ममी जैसे उस तक पहुँच नहीं पा रही हैं सिर्फ़ उनकी आवाज़ उसके इर्द-गिर्द घूम रही है।
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