उद्धरण - 546

प्रेम के माने है विवाह और विवाह के माने है कि अब चाहत और प्रेम का एक ऐसा धरातल इन्सान को मिल गया जहाँ से जीवन की दूसरी समस्याओं को समझने और सुलझाने के लिए दिल दिमाग की शक्तियाँ एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए स्वतन्त्र होती है।

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