उद्धरण - 543
भले भूखे प्यासे सही पर अपने घोंसले में बसने का आत्मविश्वास बड़ा मजबूत होता है। पाँवों के नीचे की धरती का आधार सच और ठोस लगता है।......
बऊ हमने एक किताब में पढ़ा जब तक मनुष्य आत्मरत रहता है अपने दुखों से नहीं उबर पाता। समष्टिगत प्रेम मानव को दुखों के गर्त से बाहर खींचता है।
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