उद्धरण - 542

ठीक है बेटे तू वहीं चला जा । तेरे पापा तुझे लेने आ रहे हैं। अब मैं भी नहीं रोकूँगी। जब तू ही खुश नहीं तो आख़िर अपने पापा से कम ज़िद्दी तो तू भी नहीं।.......बाँहों में भिंचे-भिंचे सीने से चिपके-चिपके बंटी के मन में बहुत दिनों का जमा हुआ कुछ पिघलने लगा। अनायास ही आँखों में आँसू आ गए। उन्हें भीतर ही भीतर पीता हुआ वह गोद से नीचे उतर आया।.......पापा ने कसकर उसे सीने से चिपका लिया रो मत बेटे बंटी रो मत और उनकी अपनी आवाज़ भी भीग गई।........जाने कहाँ से देखती हुई ममी की आँखें बिलकुल सूख गईं। बिना आँसू की भीगी-भीगी आँखे। सफ़ेद चेहरा। अब पता लगेगा ममी को।

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