उद्धरण - 541

मगर उम्र और अरमान शक्तिशाली गुण्डे की तरह बरबस अपनी ओर घसीट ले जाया करते थे। दिन के सूनेपन में खुदा और रातों की सूनी सेज मे सनम का ध्यान चुम्बक के दो सिरों की तरह अपनी-अपनी जगहों पर अटल मौजूद रहते थे। खुदा तो सनम को न पछाड़ पाया मगर सनम खुदा को अक्सर पछाड़-पछाड़ देता है।........यानी कि रूह कहती है कि मैं सात सौ सत्तर काया पलट के इस बदन में आई हूँ। मैं सब्जे यानी घास की तरह से सैकड़ों बार उगी हूँ मिटी हूँ।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549