उद्धरण - 537

जब तक डॉक्टर साहब घर में रहते हैं ममी कहीं भी रहें कुछ भी करें उनकी आँखे बंटी के आगे-पीछे ही घूमती रहती हैं उसे ही देखती रहती हैं। वह पढ़ता है तब भी वह खाता है तब भी सोता है तब भी-सर्तक चौकन्नी और घूरती हुई आँखे।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549