उद्धरण - 536

एक बार जब मैं आजमगढ़ में था तो कुछ लोग मुझसे मस्जिद बनवाने के लिए चन्दा माँगने आए। मैंने कह दिया कि जनाब नमाज़ घर में पढ़िए। ये मस्जिदें मन्दिर और गिरजे वगैरह पब्लिक प्लेसेज (जन स्थलों) आज के जमाने में नहीं बनवाने चाहिए। पुराने जमाने की बात और थी। आज के जमाने में तो इस जगहों मे खुदा के बजाय शैतान रहता है।

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