उद्धरण - 535
कितना बड़ा पत्थर छाती पर रखकर किया मैंने- स्निग्धा क्या, कोई नहीं समझेगा। मर्द रोते नहीं, खासकर औरतों के सामने, तो क्या यह मान लिया जाता है कि उन्हें कोई दुख व्यापता ही नहीं? क्या उनके कलेजे पत्थर के बने होते हैं? वे तुम्हारा हौसला टूटने से बचाये रखने के लिए ख़ामोश रहते हैं, इधर-उधर की मसरूफियात में दिल को भुलाए रखने की कोशिश करते हैं। बहादुरी से ज़िन्दगी के प्रवाह मे पाँव जमाये खड़े रहते है, परिवार को, आश्रितों को भी खड़ा रखने की कोशिश करते हैं और एक दिन उन्हें मैसिव हार्ट अटैक होता है या दिमाग की नस फट जाती है या और कुछ हो जाता है, और मर जाते हैं।
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