उद्धरण - 532

ऐसा ही होता है बहूजी ऐसा ही होता है अपने बोए-सींचे पौधों से ऐसा ही मोह होता है बिलकुल संतान-जैसा। जहाँ एक बार लगाओं वहाँ से उखाड़ा नहीं जाता। और फिर थरथराते गले से बोला तुम एक बार आकर देख जाना बंटी भैया। तुम्हारे बगीचे को तो मैं जान से भी ज़्यादा रखता हूँ।

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