उद्धरण - 530

बदकिस्मती से तुम्हारे साथ भी उसका जैसा कम्युनिकेशन और शेयरिंग होनी चाहिए, वो भी नहीं। दूसरा कोई बच्चा भी नहीं। दूसरा कोई बच्चा हो तो माँ उसकी तरफ देखकर ही तसल्ली कर ले। अनफॅारचुनेटली इस केस में तो ये भी है कि स्निग्धा का कोई भाई-बहन भी नहीं। वही होते, चार रोज़ साथ रहते, उनके बच्चों के बीच कुछ जी बहलता, तो बात बिल्कुल दूसरी होती।

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