उद्धरण - 529

समाज के अछूत दबाए हुए गरीब लोगों के पैरों के नीचे तो कोई जमीन ही नहीं है जिस पर खड़े होकर शरीर मन और दिमाग को सहारा मिल सके। यह सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं है। सदियों से कुछ नहीं हुआ है। मैं देश की आजादी का विरोधी नहीं हूँ मैं आजादी चाहता हूँ। लेकिन कांग्रेस यदि आजादी ले लेती तो क्या यह समाज बदल जाएगा।

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