उद्धरण - 522
कभी अकेले में डर लगे तो जोर-जोर से बोलकर ही कैसी राहत मिलती है। अपनी आवाज़ ही कैसा सहारा देती है।.....बत्ती बंद करते ही कमरे का सारा अँधेरा बंटी के मन में भर गया भर ही नहीं गया जैसे जम गया है। मन में आकर अँधेरा जम जाए तो कैसा लगता है कोई जान सकता है?
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