उद्धरण - 521

मेरे ख्याल में सड़क न यहाँ बनेगी न वहाँ- शायद कहीं और बन जायेगी। तुम क्या समझते हो राजनीति आज सड़कें बनाने में विश्वास रखती है? इस समय तो राजनीति बनी सड़कें नष्ट करने और काल्पनिक सड़कों की योजनाएँ पेश करने में भरोसा रखकर चल रही है। आज राहें धुँधली होती जा रही हैं।

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