उद्धरण - 518

बिटिया जहाँ पारीछा बिजली-टेसन बन गया है पहले वहाँ क्या था? गाँव जंगल और नद्दी। अब देखो कि गाँव-गाँव लट्टू झिलकते हैं। तेरौ कौल बऊ रात के समय भी दिन जैसा परकास! सूरज नारायन की धूप की सी रोसनी।

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