उद्धरण - 517

नहीं हमें पाप में मत डालो बहूजी कसम दिलाकर हम कुछ नहीं लेंगे। भगवान के दरबार में जा रहे हैं। रूपया-पइसा का होगा क्या? देना ही है तो एक वचन दे दो कि हमारे बंटी भय्या को जैसा आपने बिसरा दिया है आजकल वैसा और मत करना। बाप के रहते यह बिना बाप का हो रहा अब माँ के रहते यह बिना माँ का न हो जाए। और फूफी ने साड़ी में मुँह छिपा लिया।

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