उद्धरण - 515

मेरा ध्यान पैसा कमाने और वस्तुएँ जुटाने में लगा रहा। मैं उपलब्धियों की मीनार पर खड़ा संभावनाओं के उस पहाड़ पर निगाहें जमाये रहा जो था तो न जाने कितनी दूर, लेकिन सामने नज़र आ रहा था और जिस पर मुझे फतेह हासिल करनी थी।

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